ए मन मेरे मन ..
छुईमुई बनकर खुद को ना दुखा,
फूलों की पंखुड़ी सा मुस्कुरा ..
मुरझाना तो है तुझे एक दिन ..
उस दिन को इतनी जल्द ना बुला ...
ए मन मेरे मन ..
छुईमुई बनकर खुद को ना दुखा...
ओस की बूँद से तो पत्थर भी,
चमकता है ...
तू सितारे सा तो टिमटिमा ...
सागर ना सही तेरी किस्मत में ...
तो लहरों से खुश होजा ...
ए मन मेरे मन ..
छुईमुई बनकर खुद को ना दुखा...
हसने से है प्यार मिला ...
जीने को है जज़्बा मिला ...
जो नहीं है, उसको सोच ...
मुझे तो ना रुला ...
ए मन मेरे मन ..
छुईमुई बनकर खुद को ना दुखा...
एक पल में मुस्कराहट ...
दूजे पल हैं मोती झरते ...
बूंद बूंद कर हल्का करते ...
फिर क्यों है बिखरा करते ...
ए मन मेरे मन ..
छुईमुई बनकर खुद को ना दुखा...
सब जनता है तू, सब समझता है तू ...
फिर जल - जल बुझता है क्यों?
अच्छे बुरे का भेद करता है तू ...
फिर अंजना सा डर, तुजे खता है क्यों?
ए मन मेरे मन ....
पंक्ति....


