
आदत से कौन अछुता है... इससे से तो हर ताना बना है...
कह जाये बस कोई इतना, की मुझे इसकी आदत है...
कही फूल खिल जाते है, कही दिल उदास हो जाते है...
किसी की मुस्कान है आदत, किसी के आसू है आदत,
कोई देखे बस इन्हें गौर से...
तो फ़साना लिखती है ये आदत ...
कितनी सुन्दर है ये आदत... चित्रकार या कलाकार है ये आदत?
आदत से कौन अछुता है... इससे से तो हर ताना बना है...
आदत राह बनती है, आदत से ही बोझिल हो जाती है...
कुछ कहती है आदत, कोई सुने बस इससे गौर से....
किसी की आदत, "आदत" बन जाती है ...
आदत से कौन अछुता है... इससे से तो हर ताना बना है...
उसकी काली, बड़ी, गहरी आखो के बीच कुमकुम सा बड़ा टिका ,
लो बन गई एक आदत...
आदत से कैसे मुह चुराए कोई, जब दिल की धड़कन ही बन जाये ये आदत....
आदत से कौन अछुता है.. इससे से तो हर ताना बना है...
आदत की ख़ामोशी, मन में शोर छोड़ जाती है,
तो किसी की खिलखिला कर हँसती आदत,
मनन शांत कर जाती है....
पंक्ति....

aadat woh aadat hai jo kisi aadat ki aadat hai....
ReplyDeletebeautifully describe true "aadat"
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ReplyDeleteशुक्रिया ...
ReplyDeleteShaandar...!! Aadat to aakhir aadat hi h...!!
ReplyDelete:)
अद्भुत!!!
ReplyDeleteआप बस यूँ ही लिखने की आदत को बनाये रखिये