Sunday, July 24, 2011



अनगिनत, दुनिया की यह चुनिन्दा रस्में..
रोज़ नयी, कुछ कही कुछ अनकही कस्में ..
राज करती यह चुनिन्दा रस्में..
जा बैठी दबाकर, नन्हे मुन्ने सपनो की भस्में..

अनगिनत, दुनिया की यह चुनिन्दा रस्में ..

रोज़ लिखती एक नयी कहानी ..
कुछ बिखरती,  कुछ  रूहानी ..
हर दिल कहता अपनी ज़ुबानी..
कोई कहीं, कोई कहीं ..

अनगिनत, दुनिया की यह चुनिन्दा रस्में ..

पंक्ति ....

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आशा की नारंगी स्याही से... तलाश...  



सहमी सी में, निकली हूँ घर से..
मुस्कुराती हुयी में, मिलती हूँ सबसे..

लोग मेरे आस - पास अभी अनजाने हैं..
अब यही मेरे अपने होंगे, यह मानती हूँ में..

कौन अपना, कौन पराया..
बिना जाने चल पड़ी हूँ में ..

सहमी सी में, घर से निकली हूँ में ..
अनजानी जगह अपना घोंसला बनाने, जारही हूँ में ..

ना मंजिल,  ना मुकाम..
जाने किस चैन की तलाश में, निकल पड़ी हूँ में..

पंक्ति....

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Wednesday, January 5, 2011

ये दो अनजानी राहें...



ये दो अनजानी राहें...
राहों से राहें कुछ यूँ मिलीं,
की बेगानी ना रहीं,

ये दो अनजानी राहें...
फूलों में ओस सी समां गयीं,
सीप में मोती सी मिल गयीं,

ये दो अनजानी राहें...
हाथ में लकीर सी छप गयीं,
बाँहों में छुईमुई सी सिमट गयीं,

ये दो अनजानी राहें...
कब मोम सी पिघल गयीं पता ही ना चला,
बड़ी सी गर्म हथेली में,
कब ठण्ड नर्म हुई, पता ही ना चला,

सांस कब थमी कब तेज़ हुई पता ही ना चला,
ये "दो" अनजानी राहें...कब "एक" हुई पता ही ना चला,

ये "एक" अनजानी राहें...
ये "एक" अनजानी राहें...


पंक्ति....